HighLights
ओम बिरला के खिलाफ विपक्ष ने दिया अविश्वास प्रस्ताव नोटिस
नोटिस में तकनीकी त्रुटियां, फिर भी स्पीकर ने सुधार का दिया निर्देश
नैतिक आधार पर प्रस्ताव निपटारे तक अध्यक्षता न करने का फैसला
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के खिलाफ विपक्ष द्वारा लाए गए अविश्वास प्रस्ताव के नोटिस में कई तकनीकी खामियां पाई गईं। नियमों के अनुसार यह नोटिस खारिज किया जा सकता था, लेकिन स्पीकर ओम बिरला ने इसे अस्वीकार करने के बजाय अधिकारियों को त्रुटियां सुधारने का निर्देश दिया।
मंगलवार दोपहर लोकसभा महासचिव उत्पल कुमार सिंह को सौंपे गए इस नोटिस पर विपक्ष के 118 सांसदों के हस्ताक्षर थे। हालांकि बाद में विपक्ष ने नोटिस वापस लेकर तारीख में संशोधन करते हुए नया नोटिस फिर से जमा किया।
सूत्रों के अनुसार, नोटिस में फरवरी 2025 की घटनाओं का चार बार उल्लेख किया गया था, जो प्रक्रियात्मक रूप से त्रुटिपूर्ण माना गया। नियमों के तहत इसे सीधे खारिज किया जा सकता था, लेकिन अध्यक्ष ने लोकसभा सचिवालय को मसौदा सुधारने और प्रक्रिया आगे बढ़ाने का निर्देश दिया।
एक अधिकारी ने बताया कि संशोधित नोटिस मिलने के बाद नियमानुसार उसकी समीक्षा की जाएगी। विपक्षी दलों ने औपचारिक रूप से बिरला को पद से हटाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
विपक्षी दलों का आरोप है कि ओम बिरला ने सदन में पक्षपातपूर्ण रवैया अपनाया। इसी को आधार बनाकर संविधान के अनुच्छेद 94(सी) के तहत यह प्रस्ताव लाया गया है। कांग्रेस के लोकसभा उपनेता गौरव गोगोई, मुख्य सचेतक के. सुरेश और सचेतक मोहम्मद जावेद ने कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, द्रमुक समेत अन्य दलों की ओर से नोटिस सौंपा।
इस बीच, ओम बिरला ने नैतिकता के उच्च मानकों का पालन करते हुए प्रस्ताव के निपटारे तक अध्यक्ष की कुर्सी पर न बैठने का फैसला किया है। सूत्रों के मुताबिक, उनके खिलाफ लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर 9 मार्च को चर्चा होने की संभावना है।
(न्यूज एजेंसी पीटीआई के इनपुट के साथ)
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