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WLTP साइकिल एक नई टेस्टिंग प्रक्रिया है जिसे भारत सरकार 1 अप्रैल 2027 से लागू करने की तैयारी कर रही है। इसका मकसद गाड़ियों से निकलने वाले प्रदूषण को ज्यादा सटीक तरीके से मापना है। इस सिस्टम से पता चल सकेगा कि कौन-सी गाड़ी कितनी हानिकारक गैसें छोड़ रही है, जिससे भविष्य में प्रदूषण कम करने में मदद मिलेगी और ज्यादा eco-friendly vehicles को बढ़ावा मिलेगा।
Highlight Points:
WLTP का मतलब: World Wide Harmonized Light Vehicles Test Procedure
सरकार ने नई अधिसूचना जारी की, 1 अप्रैल 2027 से लागू होगा
गाड़ियों से निकलने वाले प्रदूषण को रियल टाइम में मापा जाएगा
कार, SUV, MPV और छोटे commercial passenger vehicles इसमें शामिल होंगे
कार्बन मोनोऑक्साइड, नाइट्रोजन ऑक्साइड, हाइड्रोकार्बन जैसे harmful elements की जांच होगी
मकसद: प्रदूषण कम करना और सटीक emission data पाना
आने वाले समय में कम प्रदूषण वाली गाड़ियों को बढ़ावा मिलेगा
भारत में बढ़ते प्रदूषण को कंट्रोल करने के लिए सरकार अब एक नया नियम लागू करने की तैयारी में है, जिसे WLTP साइकिल कहा जाता है। केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने इसकी अधिसूचना भी जारी कर दी है और इसे 1 अप्रैल 2027 से लागू करने की योजना है। आइए आसान भाषा में समझते हैं कि ये WLTP साइकिल आखिर है क्या और इससे क्या फायदा होगा।
देश के कई बड़े शहरों में प्रदूषण तेजी से बढ़ रहा है, खासकर दिल्ली-NCR इसका सबसे बड़ा उदाहरण है। यहां लाखों गाड़ियां सड़कों पर चलती हैं और साथ ही इंडस्ट्री भी है, जिससे हवा की क्वालिटी काफी खराब हो जाती है। कई बार हालात ऐसे हो जाते हैं कि लोगों को सांस लेने में तकलीफ तक होने लगती है।
प्रदूषण के पीछे कई वजहें हैं, लेकिन उनमें से एक बड़ा कारण वाहनों से निकलने वाला धुआं भी है। गाड़ियां चलने के दौरान कई तरह की हानिकारक गैसें छोड़ती हैं, जो पर्यावरण के साथ-साथ इंसानों की सेहत पर भी असर डालती हैं।
WLTP का पूरा नाम World Wide Harmonized Light Vehicles Test Procedure है। ये एक नई टेस्टिंग प्रक्रिया है, जिसके जरिए गाड़ियों से निकलने वाले प्रदूषण को ज्यादा सटीक तरीके से मापा जाएगा।
इस सिस्टम में कार्बन मोनोऑक्साइड, हाइड्रोकार्बन, नाइट्रोजन ऑक्साइड, पार्टिकुलेट मैटर और पार्टिकल नंबर जैसे खतरनाक तत्वों को रियल टाइम में चेक किया जा सकेगा। यानी साफ तौर पर पता चल जाएगा कि कौन-सी गाड़ी कितनी प्रदूषण फैला रही है।
ये नियम खासतौर पर M1 और M2 कैटेगरी के वाहनों पर लागू होगा, जिनका वजन 5 टन से कम होता है। इसमें शामिल हैं:
Passenger cars
SUVs
MPVs
Commercial passenger vehicles और छोटी बसें
इन वाहनों की टेस्टिंग AIS-175 प्रक्रिया के अनुसार चेसिस डायनेमोमीटर पर की जाएगी।
सरकार की योजना के मुताबिक WLTP साइकिल को 1 अप्रैल 2027 से लागू किया जाएगा। यानी इस तारीख के बाद बनने वाली नई गाड़ियों पर ये नियम अनिवार्य रूप से लागू होगा।
इस नियम का सीधा मकसद है गाड़ियों से निकलने वाले प्रदूषण को कम करना और सटीक डेटा के आधार पर उन्हें कंट्रोल करना। इससे आने वाले समय में ज्यादा eco-friendly और कम प्रदूषण करने वाली गाड़ियां बाजार में देखने को मिल सकती हैं, जिससे हवा की क्वालिटी बेहतर होने की उम्मीद है।
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