सरकारी कार्यक्रमों में राष्ट्रगान के बाद 6 छंदों वाला ‘वंदे मातरम्’ होगा अनिवार्य

सरकारी कार्यक्रमों में राष्ट्रगान के बाद 6 छंदों वाला ‘वंदे मातरम्’ होगा अनिवार्य

सरकारी कार्यक्रमों में राष्ट्रगान के बाद 6 छंदों वाला ‘वंदे मातरम्’ होगा अनिवार्य, सरकार ने जारी की नई गाइडलाइन्स

HighLights:

  • सरकारी कार्यक्रमों और स्कूलों में ‘वंदे मातरम्’ बजाना अब अनिवार्य

  • राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ के तुरंत बाद बजेगा पूरा गीत

  • सम्मान में सभी लोगों को खड़े रहना होगा, सिनेमा हॉल पर लागू नहीं होगा नियम

केंद्र सरकार ने ‘वंदे मातरम्’ को लेकर नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं। अब सरकारी कार्यक्रमों, स्कूलों और बड़े आयोजनों में राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ के बाद ‘वंदे मातरम्’ बजाना जरूरी होगा। इतना ही नहीं, इस बार गीत के सिर्फ शुरुआती हिस्से नहीं बल्कि इसके पूरे 6 छंद बजाए जाएंगे और वहां मौजूद सभी लोगों को सम्मान में खड़े होना होगा।

सरकार का कहना है कि यह फैसला आजादी के दौर के इस ऐतिहासिक गीत को उसकी मूल पहचान और शक्ति के साथ फिर से जोड़ने की कोशिश है। हालांकि, साफ कर दिया गया है कि यह नियम सिनेमा हॉल में फिल्मों के दौरान लागू नहीं होगा।

सरकारी आयोजनों में अब अनिवार्य होगा ‘वंदे मातरम्’

गृह मंत्रालय की नई गाइडलाइन्स के मुताबिक अब ‘वंदे मातरम्’ सिर्फ स्कूलों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि कई अहम सरकारी कार्यक्रमों में भी बजाया जाएगा। इसमें पद्म पुरस्कार जैसे बड़े नागरिक सम्मान समारोह भी शामिल हैं।

राष्ट्रपति या राज्यपाल के किसी कार्यक्रम में उनके आगमन और प्रस्थान के समय भी इस गीत को बजाया जा सकता है। तिरंगा फहराने के मौके पर और भाषण से पहले या बाद में भी इसे शामिल करने की बात कही गई है। जब भी यह गीत बजेगा या गाया जाएगा, वहां मौजूद सभी लोगों को राष्ट्रगान की तरह ही खड़े होकर सम्मान देना होगा।

राष्ट्रगान के तुरंत बाद बजेगा गीत

नई व्यवस्था के तहत सबसे पहले ‘जन गण मन’ बजाया जाएगा और उसके तुरंत बाद ‘वंदे मातरम्’। यानी दोनों को एक साथ राष्ट्रीय सम्मान के रूप में पेश किया जाएगा। यह नियम सभी सरकारी कार्यक्रमों और कई शैक्षणिक संस्थानों में लागू किया जाएगा।

पूरे 6 छंद बजाने का फैसला क्यों?

‘वंदे मातरम्’ को बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय ने 1875 में लिखा था, जो बाद में 1882 में उनके उपन्यास ‘आनंदमठ’ में प्रकाशित हुआ। इस गीत में कुल 6 छंद हैं। शुरुआती छंद भारत माता की सुंदरता और समृद्धि को दिखाते हैं, जबकि बाद के छंदों में शक्ति, ज्ञान और समृद्धि की प्रतीक देवी स्वरूप का जिक्र मिलता है।

1937 में कांग्रेस के फैजपुर अधिवेशन में सिर्फ पहले दो छंदों को ही आधिकारिक रूप से अपनाया गया था, क्योंकि बाकी छंदों में देवी-देवताओं के जिक्र पर कुछ लोगों ने आपत्ति जताई थी। अब सरकार ने फैसला लिया है कि पूरे 6 छंद बजाए जाएंगे, जो करीब 3 मिनट 10 सेकंड लंबे होते हैं।

  • छंद 1 वन्दे मातरम्।सुजलां सुफलां मलयजशीतलाम्।शस्यशामलां मातरम्।शुभ्रज्योत्स्नापुलकितयामिनीं।फुल्लकुसुमितद्रुमदलशोभिनीं।सुहासिनीं सुमधुर भाषिणीं।सुखदां वरदां मातरम्।।वन्दे मातरम्।।
  • छंद 2 वन्दे मातरम्। कोटि-कोटि-कण्ठ-कल-कल-निनाद-कराले।कोटि-कोटि-भुजैर्धृत-खरकरवाले।अबला केन मा एत बले।बहुबलधारिणीं नमामि तारिणीं।रिपुदलवारिणीं मातरम्।।वन्दे मातरम्।।
  • छंद 3 वन्दे मातरम्। तुमि विद्या, तुमि धर्म।तुमि हृदि, तुमि मर्म।त्वं हि प्राणाः शरीरे।बाहुते तुमि मा शक्ति।हृदये तुमि मा भक्ति।तोमारई प्रतिमा गडि।मन्दिरे-मन्दिरे मातरम्।।वन्दे मातरम्।।
  • छंद 4 वन्दे मातरम्। त्वं हि दुर्गा दशप्रहरणधारिणी।कमला कमलदलविहारिणी।वाणी विद्यादायिनी।नमामि त्वाम्।नमामि कमलां अमलां अतुलां।सुजलां सुफलां मातरम्।।वन्दे मातरम्।।
  • छंद 5 वन्दे मातरम्। श्यामलां सरलां सुस्मितां भूषितां।धरणीं भरणीं मातरम्।शत्रु-दल-वारिणीं।मातरम्।।वन्दे मातरम्।।
  • छंद 6 वन्दे मातरम्। त्वं हि शक्ति, त्वं हि शक्ति।त्वं हि शक्ति मातरम्।वन्दे मातरम्।।

क्या होगा इसका असर?

सरकार का मानना है कि इस कदम से ‘वंदे मातरम्’ को फिर से राष्ट्रीय भावना के साथ जोड़ा जा सकेगा और नई पीढ़ी को इसके ऐतिहासिक महत्व के बारे में ज्यादा जानकारी मिलेगी। स्कूलों और सरकारी आयोजनों में इसे नियमित रूप से बजाने से लोगों में देशभक्ति और सांस्कृतिक जुड़ाव और मजबूत होगा।

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