Short Summary:
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के खिलाफ विपक्षी दलों ने अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस दिया है। उन पर सदन में पक्षपात करने और विपक्षी नेताओं को बोलने से रोकने के आरोप लगाए गए हैं। करीब 120 सांसदों ने इस प्रस्ताव का समर्थन किया, लेकिन राहुल गांधी और अखिलेश यादव ने हस्ताक्षर नहीं किए। अब इस नोटिस की जांच के बाद इसे सदन में चर्चा और वोटिंग के लिए लाया जा सकता है।
Highlight Points:
ओम बिरला के खिलाफ विपक्ष ने अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस दिया।
INDIA गठबंधन के लगभग 120 सांसदों ने साइन किए।
राहुल गांधी और अखिलेश यादव ने प्रस्ताव पर हस्ताक्षर नहीं किए।
स्पीकर पर पक्षपात और विपक्ष को बोलने से रोकने के आरोप।
8 विपक्षी सांसदों के निलंबन और राहुल गांधी को बोलने से रोकने का मामला भी वजह बना।
परंपरा के मुताबिक ओम बिरला ने प्रक्रिया पूरी होने तक अध्यक्षता न करने का फैसला किया।
अब लोकसभा सचिवालय नोटिस की जांच करेगा, फिर सदन में चर्चा और वोटिंग हो सकती है।
नई दिल्ली। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के खिलाफ विपक्षी दलों ने अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस दे दिया है। विपक्ष का आरोप है कि सदन की कार्यवाही के दौरान स्पीकर की तरफ से पक्षपात किया जा रहा है और कई मौकों पर विपक्षी सांसदों को बोलने का मौका नहीं दिया गया। इस नोटिस पर INDIA गठबंधन के करीब 120 सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं, हालांकि तृणमूल कांग्रेस ने इसमें हिस्सा नहीं लिया।
सबसे ज्यादा चर्चा इस बात को लेकर हो रही है कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी और समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने इस प्रस्ताव पर साइन क्यों नहीं किए। दोनों नेताओं के हस्ताक्षर न होने से सियासी हलकों में अलग-अलग तरह की चर्चा चल रही है।
अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस मिलने के बाद ओम बिरला ने इसे आगे की प्रक्रिया के लिए लोकसभा सचिवालय को भेज दिया है। साथ ही परंपरा के मुताबिक उन्होंने फैसला किया है कि जब तक इस प्रस्ताव की प्रक्रिया पूरी नहीं हो जाती, तब तक वे सदन की अध्यक्षता नहीं करेंगे।
इस पूरे मामले ने संसद के माहौल को और ज्यादा गरमा दिया है। पहले ही राहुल गांधी को धन्यवाद प्रस्ताव पर बोलने की अनुमति न देने को लेकर विवाद चल रहा था, अब अविश्वास प्रस्ताव के बाद सियासी टकराव और तेज हो गया है।
कांग्रेस, डीएमके, सपा, शिवसेना (यूबीटी) समेत कई विपक्षी दलों के सांसदों ने संविधान के अनुच्छेद 94C के तहत यह नोटिस लोकसभा महासचिव को सौंपा। इसमें कांग्रेस के उपनेता गौरव गोगोई, सचेतक मोहम्मद जावेद और कई अन्य विपक्षी सांसद शामिल रहे।
विपक्ष ने अपने नोटिस में चार मुख्य वजहें बताई हैं—
सदन का एकतरफा संचालन – आरोप है कि स्पीकर कई मौकों पर विपक्षी नेताओं को बोलने का मौका नहीं देते, जो उनके लोकतांत्रिक अधिकारों के खिलाफ है।
राहुल गांधी को बोलने से रोकना – 2 फरवरी को राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव के दौरान राहुल गांधी को नहीं बोलने देने का उदाहरण भी नोटिस में दिया गया।
सांसदों का निलंबन – 3 फरवरी को आठ विपक्षी सांसदों को बजट सत्र से निलंबित किए जाने को मनमाना कदम बताया गया।
आपत्तिजनक बयान पर कार्रवाई न करना – भाजपा सांसद द्वारा दो पूर्व प्रधानमंत्रियों पर निजी टिप्पणी करने के बावजूद कोई सख्त कार्रवाई न करने पर भी सवाल उठाए गए।
इसके अलावा महिला सांसदों से जुड़ी कुछ टिप्पणियों को भी नोटिस में अपमानजनक बताया गया है।
सूत्रों के मुताबिक राहुल गांधी ने इस प्रस्ताव पर इसलिए हस्ताक्षर नहीं किए क्योंकि वे लोकसभा में नेता विपक्ष के संवैधानिक पद पर हैं। कांग्रेस का कहना है कि संसदीय मर्यादा को ध्यान में रखते हुए उन्होंने साइन से दूरी बनाई।
वहीं समाजवादी पार्टी के कई सांसदों ने इस प्रस्ताव का समर्थन किया है, लेकिन अखिलेश यादव ने खुद हस्ताक्षर नहीं किए। हालांकि उनकी पार्टी की तरफ से समर्थन बना हुआ है।
अब लोकसभा सचिवालय इस नोटिस की जांच करेगा। अगर यह नियमों के अनुसार सही पाया गया, तो इसे सदन में चर्चा और फिर वोटिंग के लिए रखा जाएगा।
हालांकि एनडीए के पास लोकसभा में बहुमत है, इसलिए यह माना जा रहा है कि इस प्रस्ताव से ओम बिरला की कुर्सी को सीधा खतरा नहीं है। लेकिन इससे संसद के अंदर सियासी टकराव और माहौल की तल्खी जरूर बढ़ सकती है।
पहले भी लोकसभा के तीन स्पीकर—जीवी मावलंकर, हुकुम सिंह और बलराम जाखड़—के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाया जा चुका है, लेकिन हर बार वह खारिज हो गया था।
ये भी पढ़े - ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव: अखिलेश-राहुल ने क्यों नहीं किए साइन
No comments yet. Be the first to comment!